गत सप्ताह मैं एक अल्पकालिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए कोलकाता गया था और इसी कारणवश कोई ब्लॉग नहीं लिख सका| अल्पकालिक पाठ्यक्रम का विषय था “पदार्थ लक्षण-वर्णन के उन्नत तरीके : सूक्ष्मदर्शिकी एवं विवर्तन” (Advanced Techniques of Materials Characterization : Microscopy and Diffraction)| इसका आयोजन मेटीरियल्स रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (कोलकाता चैप्टर) द्वारा केंद्रीय कांच व सेरेमिक अनुसंधान संस्थान (CGCRI) में किया गया था|
झारखण्ड बंद की बदौलत हमारी सियालदाह राजधानी एक्सप्रेस पाँच घंटा देरी से मंजिल पे पहुँची| आयोजकों द्वारा दी गयी पूर्वसूचना और हमारी अपने स्थानीय मित्रों से की गयी पूछताछ की वजह से बंगाल इंजीनियरिंग और साइंस यूनिवर्सिटी के अतिथि गृह पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं हुई| क्योंकि शाम हो चुकी थी तो हमने पास ही में केवल रबीन्द्र सदन जाने का प्लान बनाया| वहाँ पर हम नंदन भी गए जोकि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पोषित फ़िल्म केन्द्र है| एकैडमी ऑफ़ फाइन आर्ट्स में स्थित कुछ कलाकारों की विकृत कलाकारी के नमूने देखे जो हमारी समझ से पूर्णतया परे थे| फिर थोड़ा सड़कों पे फिरते हुए बिड़ला तारामंडल और विक्टोरिया मेमोरियल प्रांगण में स्थित प्रकाशमय वाटर फाउंटेन शो देखकर वापस अतिथि गृह लौट आये|
प्रातः ८ बजे सजधज के तैयार हुए CGCRI जाने के लिए जहाँ पर इस पाठ्यक्रम का आयोजन था| साढ़े ९ बजे उद्घाटन सत्र प्रारम्भ हुआ| थोड़ी और बकबक और माननीयों द्वारा एक दूसरे की प्रसंशा के पुल बंधने के बाद १० बजे पहला विशिष्ट व्याख्यान शुरू हुआ| प्रवक्ता डिफेंस मेटीरियल्स रिसर्च लैब के डा. दीपांकर बनर्जी थे| उन्होंने ट्रांस्मिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से संबंधित कुछ रोचक तथ्य बताये| फ़िर दिनभर पदार्थ लक्षण-वर्णन (Materials Characterization) से संबन्धित अन्य तरीकों पे कुछ व्याख्यान तथा बहस हुई| ये पदार्थ लक्षण-वर्णन क्या होता है और इसे कैसे किया जाता है ये आपको बाद में एक तकनीकी लेख में बताऊँगा| दूसरा दिन आई. आई. एस. सी. के डा. रविशंकर के व्याख्यान के अलावा नीरस ही रहा| महत्त्वाकांक्षी हाई-टेक विडियो-कॉन्फरेंसिंग से लैब प्रदर्शन की योजना फ्लॉप साबित हुई|
फ़िर आया ममता बनर्जी का बंगाल बंद| आयोजकों ने भी ठान लिया कि चाहे जो हो जाय ये कोर्स नहीं रुकेगा| प्रातः चार बजे ही हमें गेस्ट हाउस से निकाल कर CGCRI में नज़रबंद कर दिया गया| ख़ैर इतनी जल्दी उठाने के अलावा बाकी कोई परेशानी नहीं हुई| इसी प्रकार दिन एक एक करके गुजरे और कैसे पाँच दिन बीत गए पता ही नहीं चला| एक बड़ी उपलब्धि की बात ये रही कि हमने कोर्स का एक भी व्याख्यान या सत्र नहीं छोड़ा जिसमें ५ विशिष्ट व्याख्यान १४ कोर्स व्याख्यान और ६ लैब प्रदर्शन थे| यह बताने की कोई आवश्यकता तो नहीं है कि इसके अलावा ५ लंच तथा १० चाय सत्रों में भी हमने अपनी उपस्थिति बड़ी ईमानदारी से दर्ज की|
छठा दिन हमने कोलकाता भ्रमण के नाम रखा था| इसमें हमने बेलूर मठ, दक्षिणेश्वर मन्दिर, धर्मतला (esplanade) और विक्टोरिया मेमोरियल का भ्रमण किया| राधा कृष्ण मन्दिर जो बिड़ला मन्दिर के नाम से अधिक प्रसिद्ध है पहले ही एक दिन CGCRI से लौटते समय देख लिया था|
इस लेख में लगाई गयी कुछ तस्वीरों के अलावा यदि आप में धैर्य है और समय भी तो आप निम्नांकित लिंक पर जाकर अन्य तस्वीरों का लुत्फ़ (शायद) उठा सकते हैं|
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| कोलकाता यात्रा और ऐ. टी. एम. सी. – ०७ |




November 4, 2007 at 7:07 am |
विद्वान टाइप बन्दे हो मित्र। ट्रेवलॉग तो जमा पर वर्कशॉप के विषय से कुछ पल्ले नहीं पड़ा। काफी जमाने से नॉन टेक हो गया हूं न!
November 5, 2007 at 7:18 am |
यह क्या गज़ब किया अंकुर !
हमारे ही संस्थान में आए,इतना समय (पांच दिन) रहे और बिना मिले चले गए . यह जुर्म तो नाकाबिल-ए-माफ़ी है . कुछ दोष अनूप जी और ज्ञान जी पर भी जाता है जो उन्होंने अंकुर को बताया नहीं कि हियां हमहूं बिराजते हैं .
तस्वीरों में अपने संस्थान का प्रेक्षागृह और एपीसी राय सेमिनार हॉल दिखाई दिया तथा ग्रुप फोटो में सहकर्मी-मित्र डॉ. अनूप मुखर्जी दिखाई दिए .
अपराध तो हुआ है . सजा क्या सुनाई जाए ?
November 5, 2007 at 2:05 pm |
बचाव पक्ष को भी कुछ मौका दिया जाय, सज़ा सुनाने से पहले| यदि आपने ने ध्यान दिया हो तो मैंने अपने ब्लॉग लेखन प्रारम्भ करने के अगले ही दिन अपनी भविष्य यात्राओं का खुलासा कर दिया था| इसी उम्मीद में कि शायद किसी से मिलना हो जाय| खैर जो हुआ सो हुआ| कोलकाता आना जाना तो लगा ही रहता है, भविष्य में ईश्वर ने चाहा तो अवश्य मुलाकात होगी| आप भी यदि कभी कानपुर आयें तो दर्शन अवश्य दें|
November 6, 2007 at 2:19 pm |
ठीक है! सजा का विचार खारिज . मैत्री शुरु .
November 13, 2007 at 7:21 am |
थोड़े समय में काफी कलकत्ता देख लिया. अच्छा लगा अपने कलकत्ता को फिर से देखकर.