जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि सूक्ष्मदर्शी (microscope) का प्रयोग उन सूक्ष्म वस्तुओं को देखने हेतु किया जाता है जिन्हें नग्न दृष्टि से देख पाना सम्भव नहीं होता है| किंतु सूक्ष्मदर्शियों के प्रकार तथा सिद्धांतों से संभवतः अधिकतर लोग अनभिज्ञ होंगे| इस लेख तथा आगे आने वाले लेखों की मदद से मैं इसी विषय पर कुछ प्रकाश डालने की चेष्टा करूंगा|
मुख्यतः सूक्ष्मदार्शियों को निम्नलिखित प्रवर्गों में विभाजित किया जा सकता है:
१. प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी (Optical or light microscope)
२. इलैक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron microscope)
३. क्रमवीक्षण अन्वेषक सूक्ष्मदर्शी (Scanning probe microscope)
पहले दो प्रवर्गों के सूक्ष्मदर्शी लगभग एक ही सिद्धांत पर कार्य करते हैं| जहाँ एक ओर प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी में विद्युतचुम्बकीय तरंगों (दृश्य प्रकाश) को कांच के लेंसों के माध्यम से संकेंद्रित करके सूक्ष्म वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाया जाता है वहीं दूसरी ओर इलैक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में इलैक्ट्रॉन तरंगों को विद्युत्चुम्बकीय लेंसों द्वारा संकेंद्रित करके प्रतिबिम्ब का निर्माण होता है| ज्ञातव्य हो कि इलैक्ट्रॉन में कण तथा तरंग की दोहरी प्रवृत्ति पायी जाती है| सैद्धांतिक रूप से ये दोनों प्रवर्ग मानवीय नेत्रों से देखने जैसे ही हैं| जबकि तीसरे प्रवर्ग के सूक्ष्मदर्शी एकदम अलग सिद्धांत पर कार्य करते हैं| इनमें एक अन्वेषक (probe) होता है जो कि क्रमशः वस्तु की सतह पर जाकर यन्त्र को उसके बारे में विभिन्न संकेतों के माध्यम से सूचना देता है| इस वर्ग के सूक्ष्मदार्शियों का नामकरण इस संकेत के प्रकार पर किया जाता है | उदाहरण के लिए यदि यह संकेत, अणुओं के बीच लगने वाले बल के रूप में सूचना देता है तो इसे आणविक बल सूक्ष्मदर्शी (Atomic force microscope) कहते हैं| सैद्धांतिक रूप से यह प्रवर्ग एक दृष्टिविहीन मनुष्य द्वारा छूकर वस्तु के स्वरूप का अनुमान लगाने जैसा है|
Posted by अंकुर वर्मा