बंगलुरू में अपने दूसरे सप्ताहांत पर अपने मित्र चन्द्रशेखर (जिसे मैं चंदू और ऑफिस वाले चन्द्रा जी बुलाते हैं) के साथ लालबाग वानस्पतिक उद्यान (botanical garden) घूमने का अवसर प्राप्त हुआ| बंगलुरू में यह देखा जाय तो यह हमारा प्रथम पर्यटक स्थान भ्रमण था, वैसे पिछले सप्ताह हम आई. आई. एस सी. के पास ही यशवंतपुर स्थित इस्कॉन मन्दिर भी गए थे| इस उद्यान की स्थापना मैसूर के सुल्तान हैदर अली ने १७४० से १७६० के बीच की थी, बाद में अंग्रेजों तथा आज़ादी के बाद सरकार ने इसका विस्तार तथा देखभाल की| यह एक शाम बिताने के लिए अच्छा स्थल है और प्रेमी युगल तो अपनी कई शामें यहीं बिताते हैं| यह लगभग बंगलुरू के केन्द्र में है और यातायात की कोई असुविधा नहीं है| यहाँ पर देखने के लिए अनेक दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधे और पक्षी, एक शीश महल, लालबाग झील इत्यादी स्थान हैं| पूरा घूमने के लिए कम से कम २ घंटे का समय चाहिए, वैसे विद्युत चालित वैन भी चलती है जिससे इसे कम समय में भी निपटाया जा सकता है| इस जगह का मूल्यांकन आप निम्नांकित लिंक पर उपस्थित मेरी चित्रावली से भी कर सकते हैं|
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| लालबाग, बंगलुरू |

December 7, 2007 at 7:33 pm |
यह स्थान मुझे बहुत प्रिय लगा था।
December 8, 2007 at 3:06 am |
खैर ये चित्र तो हम पहले देख ही चुके हैं, मुझे वहाँ मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाना बडा अच्छा लगता था । उसके अलावा वहाँ से नजदीक ही M.T.R. भोजनालय भी है, कम से कम एक बार तो हो ही आना । वैसे अब तुम्हे खाने की सलाह देने में थोडा डर लगता है क्यों ये तुम्हे मालूम ही है
मुझे बाद में पता चला कि IISC में टी.एम.सी. कैण्टीन बन्द हो गयी है, वैसे ब्लाग पोस्ट का मसाला जुटाना हो तो कभी होयसाला हाउस चले जाना
December 8, 2007 at 9:28 am |
हाँ, टी. एम. सी. कैंटीन की जगह ही अब काबिनी कैंटीन है, वहाँ का खाना जरूर थोड़ा सही है| अभी तक काफ़ी बोर्ड और टी बोर्ड जाने का मौका नहीं लगा पर गत सप्ताह अपने एक आई आई टी कानपुर के मित्र से मिलने होयसाला हाउस जरूर गया था| लगता है कि जे आर डी टाटा के बाद लोगों ने बस केवल रंगाई पुताई ही कराई है|