शायर: अहमद फ़राज़
स्वर: मेंहदी हसन
शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो
(सदाएं == आवाज़)
जो ज़हर पी चुका हूँ तुम्हीं ने मुझे दिया
अब तुम तो ज़िंदगी की दुआएं मुझे न दो
शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो
ऐसा कभी न हो के पलट कर न आ सकूँ
हर बार दूर जा के सदाएं मुझे न दो
शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो
कब मुझको ऐतराफ़-ए-मुहब्बत न था ‘फ़राज़’
कब मैंने ये कहा था सज़ाएं मुझे न दो
( ऐतराफ़ == क़ुबूल, स्वीकार)
शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो
यू-ट्यूब वीडियो:
February 5, 2008 at 4:25 am |
बहुत बढिया,
आजकल गज़लों में डूबे हुये हो क्या? एक के बाद एक अच्छी गज़लें सुनवा रहे हो । इस (जिन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं, मैं तो मर के भी मेरी जान तुझे चाहूँगा) गज़ल का लाइव वीडियो जुगाड कर सको तो मजा आ जायेगा ।
February 5, 2008 at 5:12 am |
ये लो मिल गया, सुनो
http://www.youtube.com/watch?v=KIWvaupRGBo&
February 5, 2008 at 6:59 am |
बढ़िया, ऐसे ही रस बांटते रहो।