शायर: _______ (यदि ज्ञात हो तो कृपया अवगत करायें)
स्वर: मुन्नी बेग़म
फ़िरदौस झूम उठे फ़ज़ा मुस्कुरा उठे
तुम मुस्कुरा उठो तो ख़ुदा मुस्कुरा उठे
एक बार मुस्कुरा दो, एक बार मुस्कुरा दो (५)
अफ़साना-ए-चमन का, उनवान ही बदल दो,
फ़ूलों का सर कुचल दो, कलियों का दिल मसल दो,
आकाश की जवानी, बादल में मुँह छुपाये,
माहताब डूब जाये, तारों को नींद आये,
जोहराज़बीं परीरू, तमसील माह-ओ-अंजुम,
आँखें शराब आंघी, जज़्बात में तलातुम,
हिलते हुये लबों पर, हँसता हुआ तराना,
ऐ दिलनवाज़ पैकर, ख़ातिर में है ज़माना,
लब हाय अहमरीं पर, निखरी हुयी है लाली,
ये हल्की-हल्की सुर्खी, तस्वीर है शफ़क़ की,
आवारा शोख़ ज़ुल्फ़ें, रुख़सार चूमती है,
रुख़सार चूमती है, बेख़ुद हैं घूमतीं हैं,
हो जीस्त का सहारा, तुम मौज मैं किनारा,
लेकिन सुनो ख़ुदारा, एक बार मुस्कुरा दो,
एक बार मुस्कुरा दो, जुल्मी एक बार मुस्कुरा दो
एक नौजवाँ मुसाफ़िर, फ़ितरत का ला-उबाली;
एक आलमी जुनूमीं, एक सम्त जा रहा था;
जैसे के अपनी धुन में, पर्बत पे चढ़ रहा था;
जुल्फ़ें के मुन्तशर थीं, चेहरे से मुज़मयीं था;
नज़रें के राह पे थीं, कितना शिकस्त दिल था;
माज़ी की धुन्द अकूनी, एक अक्स पा रहा था;
गुज़रा हुआ ज़माना, फ़िर याद आ रहा था;
अरमाँ तड़प रहे थे, हसरत मचल रही थी;
बेताब ज़िन्दगानी, करवट बदल रही थी;
गिन गिन तारे, हाय बेचारे;
गिन गिन तारे, हाय बेचारे;
चैन ना आये, जी घबराये;
देख तो क्या है, कौन बसा है;
दीदा-ए-शर्मी, नीची नज़र में;
शीशा-ए-दिल में, आँख के तिल में;
दिल को जलाना, खेल है जाना;
दिल को जलाकर, आग लगाकर;
खुद भी जलोगे, हाथ मलोगे;
तुम शम्म-ए-फ़रोज़ाँ हो, खुद भी जलो जला दो;
लेकिन एक बार मुस्कुरा दो, एक बार मुस्कुरा दो,
जुल्मी एक बार मुस्कुरा दो।
तुम जान-ए-मुद्दआ हो, एक हुस्न दिलरुबा हो,
इतना तो मैं कहूँगा, मेरी ही इस ग़ज़ल का,
रंगीन क़ाफ़िया हो, एक बात तुमसे पूछूँ,
बोलो जवाब दोगी, ये हुस्न ये जवानी,
सरकार क्या करोगी, होठों की मुस्कुराहट,
बेचो ख़रीद लूँगा, मंजूर हो तो बोलो, अनमोल दाम दूँगा,
लेकिन एक बार मुस्कुरा दो, एक बार मुस्कुरा दो,
एक बार मुस्कुरा दो, एक बार मुस्कुरा दो (४)
यू-ट्यूब वीडियो:
दूसरा भाग (सम्भवतः मूल रचना नहीं)
एक बार मुस्कुरा दो (४)
होंठों की एक अज़ा से सौ बिजलियाँ गिरा दो
एक बार मुस्कुरा दो
इस दिल का हाल सुन के मेरा सवाल सुन के (२)
आँचल सम्भाल के तुम शर्मा के सर झुका दो
एक बार मुस्कुरा दो
हाँ ना के बीच में हूँ क्या समझूँ क्या न समझूँ (२)
जो कह सको न मुँह से अंदाज़ से बता दो (२)
ये नन्हीं नन्हीं कलियाँ (२)
ये फूल और ये क्यारी
हल्कि सी एक हँसी की सबको है इंतज़ारी
घूँघट हटा के इनका अरमान भी मिटा दो
एक बार मुस्कुरा दो (२)
Posted by अंकुर वर्मा