कू-ब-कू फैल गयी बात

February 9, 2008

रचना: परवीन शाकिर
स्वर: मेंहदी हसन
राग: दरबारी

कू-ब-कू फैल गयी बात शनासाई की
उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की
(कू-ब-कू == गली गली में, शनासाई == जान पहचान, पज़ीराई == स्वागत)

कैसे कह दूँ के मुझे छोड़ दिया है उसने
बात तो सच है मगर बात है रुसवाई की

वो कहीं भी गया लौटा तो मेरे पास आया
बस यही बात है अच्छी मेरे हरजाई की
(हरजाई == बेवफ़ा)

उसने जलती हुयी पेशानी पे जब हाथ रखा
रूह तक आ गयी तासीर मसीहाई की
(पेशानी == माथा, तासीर == असर)

तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे
तुझपे गुज़रे न क़यामत शबे तन्हाई की

यू-ट्यूब वीडियो:
मेंहदी हसन की आवाज़ में ग़ज़ल

परवीन शाकिर एक मुशायरे में