शायर: क़तील शिफ़ाई
स्वर: मेंहदी हसन
फ़िल्म: अज़्मत
ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिये थोड़ी है
इक ज़रा सा ग़म-ए-दौराँ का भी हक़ है जिस पर
मैंने वो साँस भी तेरे लिये रख छोड़ी है
तुझ पे हो जाऊँगा क़ुर्बान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
अपने जज़बात में नग़मात रचाने के लिये
मैंने धड़कन की तरह दिल में बसाया है तुझे
मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करूँ
मैंने क़िस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे
प्यार का बन के निगेहबान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
तेरी हर चाप से जलते हैं ख़यालों में चिराग़
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये
तुझको छू लूँ तो फ़िर ए जान-ए-तमन्ना मुझको
देर तक अपने बदन से तेरी ख़ुशबू आये
तू बहारों का है उनवान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा
ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
मेंहदी हसन एक महफ़िल में गाते हुये:
फ़िल्म अज़्मत (1973) का वीडियो:
क़तील शिफ़ाई: संक्षिप्त परिचय
वास्तविक नाम: औरंगज़ेब ख़ान
जन्म: 24 दिसम्बर, 1919
उस्ताद: हकीम मोहम्मद ‘शिफ़ा’
गीत संग्रह: मुतरिबा
पेशा: पाकिस्तानी और हिन्दी फ़िल्मों के गीतकार
फ़िल्मों में ग़ज़ल के स्तर को उठाने के लिये जाने जाते हैं। आपने सरल हिन्दी और उर्दू शब्दों के प्रयोग से उर्दू गीतों को आम जनता में लोकप्रियता दिलाई। जगजीत सिंह और चित्रा के साथ भी कई एलबम में काम किया।
Posted by अंकुर वर्मा