रचना: सूफ़ी ग़ुलाम मुस्तफ़ा तबस्सुम
स्वर: फ़रीदा ख़ानुम
वो मुझसे हुये हमकलाम अल्लाह अल्लाह
कहाँ मैं कहाँ ये मकाम अल्लाह
वो रु-ए-दरख़्शाँ वो ज़ुल्फ़ों के साये
वो हंगामा-ए-सुबह-ओ-शाम अल्लाह अल्लाह
(रु-ए-दरख़्शाँ == रोशन चेहरा)
वो सहमा हुआ आँसुओं का तलातुम
वो आब-ए-रवा बेशरम अल्लाह अल्लाह
(तलातुम == सैलाब, तूफ़ान, आब-ए-रवा == बहता हुआ पानी)
वो ज़ब्त-ए-सुख़न में लबों की ख़ामोशी
नज़र का वो लुत्फ़-ए-करम अल्लाह अल्लाह
(ज़ब्त-ए-सुख़न == बातों पर नियंत्रण, लुत्फ़-ए-करम == कृपा का आनंद)