हमें जहाँ में कोई साहिब-ए-नज़र न मिला

स्वर: गुल बहार बानो

हमें जहाँ में कोई साहिब-ए-नज़र न मिला
जो दिल की आँख से देखे वो दिल गवर न मिला
(दिल गवर == दिलवाला)

मता-ए-ज़िस्त में शामिल रहे हज़ार रफ़ीक़
वो जिसकी चाह थी दिल को वही मगर न मिला
(मता-ए-ज़िस्त == ?, रफ़ीक़ == दोस्त)

मुसाफ़िरों की थकावट कुछ इसलिये भी थी
सफ़र में धूप मिली साया-ए-जज़र न मिला
(साया-ए-जज़र == तनिक सी छाँव)

तलाश करते रहे हम कहाँ कहाँ लेकिन
सुकून-ए-कर्ब-नज़र हमको हमनज़र न मिला
(कर्ब-नज़र == व्यथित आँखें)

हमें जहाँ में कोई साहिब-ए-नज़र न मिला

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