ओ बेदर्दी सपने में आजा

स्वर: बेग़म अख़्तर

ओ बेदर्दी सपने में आजा,
कुछ तो बिपतिया कम होइ जाये

हम ई नाहीं जानियो साजन,
नैना के मिलते जुलुम होइ जाये

चाँद गगन से झाँके मोहे,
पापी दुनिया ताने देवे
खुल के कहूँ तो होवे रुसवाई,
चुप मा जियरा भसम होई जाये

One Response to “ओ बेदर्दी सपने में आजा”

  1. समीर लाल Says:

    आनन्द आ गया, आभार.

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