स्वर: बेग़म अख़्तर
ओ बेदर्दी सपने में आजा,
कुछ तो बिपतिया कम होइ जाये
हम ई नाहीं जानियो साजन,
नैना के मिलते जुलुम होइ जाये
चाँद गगन से झाँके मोहे,
पापी दुनिया ताने देवे
खुल के कहूँ तो होवे रुसवाई,
चुप मा जियरा भसम होई जाये
स्वर: बेग़म अख़्तर
ओ बेदर्दी सपने में आजा,
कुछ तो बिपतिया कम होइ जाये
हम ई नाहीं जानियो साजन,
नैना के मिलते जुलुम होइ जाये
चाँद गगन से झाँके मोहे,
पापी दुनिया ताने देवे
खुल के कहूँ तो होवे रुसवाई,
चुप मा जियरा भसम होई जाये
March 31, 2008 at 10:16 am |
आनन्द आ गया, आभार.