बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ

April 30, 2008

स्वर: नय्यारा नूर

बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ उबटन खेलन हारे

अबीर गुलाल कुसुम और केसर भर-भर लई पिचकारी

रिमझिम-रिमझिम मेघा बरसे महक उठी फुलवारी


दरिया पार उतर जाऊँ

April 29, 2008

स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम

दरिया पार उतर जाऊँ फिर चाहे मैं मर जाऊँ

दिल दुखता ही रहता है मैं जिस सोच नगर जाऊँ

ज़िन्दा हूँ इल्ज़ाम तरह जाने किसके सर जाऊँ

तन्हाई है साथ तो फिर किससे मिलने घर जाऊँ


तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है

April 28, 2008

स्वर: सनी बेंजामिन जॉन

तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है
ये माना के महफ़िल जवाँ है हसीं है

निगाहों में तू है ये दिल झूमता है
न जाने मोहब्बत की राहों मे क्या है
जो तू हम सफ़र है तो कुछ ग़म नहीं है
ये माना के महफ़िल जवाँ है हसीं है

वो आयें न आयें जमीं हैं निगाहें
सितारों ने देखीं है झुक झुक के राहें
ये दिल बदग़ुमाँ है नज़र को यकीं है
ये माना के महफ़िल जवाँ है हसीं है

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है ये आलम तुझे भुलाने में

April 27, 2008

रचना: सरूर बाराबंकवी
स्वर: फ़िरदौसी बेग़म
फ़िल्म: नवाब सिराजुद्दौला

है ये आलम तुझे भुलाने में, अश्क आते हैं मुस्कुराने में

एक सूरत भी आशना सी नहीं, इतनी तनहा हूँ मैं जमाने में

वो मेरे ख़ून-ए-आरज़ू से सही, रंग तो आ गया फ़साने में

कितनी सुनसान है चमन की फ़िज़ा, दिल धड़कता है आशियाने में

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भूले से भी कोई यहाँ

April 26, 2008

स्वर: सुरय्या मुल्तानिकर

भूले से भी कोई यहाँ कह दो के न लगाये दिल
एक हँसी के वास्ते शाम-ओ-सहर रुलाये दिल

हम में नहीं ये हौसला, हमसे कहा न जायेगा
अश्कों से पूछिये अगर सुनना हो माजरा-ए-दिल

झूठी कसम न खाइये जाइये कर लिया यकीं
तुममें कुछ ऐसी बात है हर बात भूल जाये दिल