मोहब्बत करनेवाले कम न होंगे
April 3, 2008रचना: हफ़ीज़ होशियारपुरी
स्वर: मेहदी हसन
मोहब्बत करनेवाले कम न होंगे
तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे
ज़माने भर के ग़म या इक तेरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे
दिलों की उलझनें बढ़ती रहेंगी
अगर कुछ मश्वरे बाहम न होंगे
(बाहम == आपस में)
अगर तू इत्तफ़ाक़न मिल भी जाये
तेरी फ़ुर्क़त के सदमें कम न होंगे
(फ़ुर्क़त == जुदाई)
‘हफ़ीज़’ उन से मैं जितना बदगुमाँ हूँ
वो मुझ से इस क़दर बर्हम न होंगे
(बदगुमाँ == शक करना, बर्हम == नाराज़)
Posted by अंकुर वर्मा