मेरा दर्द नग़मा-ए-बेसदा
रचना: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
स्वर: नय्यारा नूर
मेरा दर्द नग़मा-ए-बेसदा
मेरी ज़ात ज़र्रा-ए-बेनिशाँ
मेरे दर्द को जो ज़ुबाँ मिले
मुझे अपना नाम-ओ-निशाँ मिले
मेरी ज़ात को जो निशाँ मिले
मुझे राज़-ए-नज़्म-ए-जहाँ मिले
जो मुझे ये राज़-ए-निहाँ मिले
मेरी ख़ामोशी को बयाँ मिले
मुझे क़ायनात की सरवरी
मुझे दौलत-ए-दो-जहाँ मिले
April 4, 2008 at 9:38 pm
वाह ! क्या बात है. शुक्रिया.
April 4, 2008 at 9:56 pm
वाह!! बहुत आभार.