तूने बुत-ए-हरजाई

स्वर: बेग़म अख़्तर / नय्यारा नूर

तूने बुत-ए-हरजाई कुछ ऐसी अदा पाई
तकता है तेरी सूरत हर एक तमाशाई

पहले से न सोचा था अंजाम मोहब्बत का
तब होश में आये हैं जब जान पे बन आई

जी भर गया दुनिया से अब दिल में ये हसरत है
मैं हूँ या तेरा जलवा और ग़ोशा-ए-तनहाई

तानों से है दिल ज़ख़्मी ज़ख़्मों से जिगर ख़ूँ है
लो दिल के लगाने की हमने ये सज़ा पाई

बेग़म अख़्तर

नय्यारा नूर

One Response to “तूने बुत-ए-हरजाई”

  1. समीर लाल Says:

    वाह जी वाह!!! आभार.

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