तसव्वुर ख़ानुम के गाये कुछ लोकगीत

तू मेरी ज़िन्दगी है

अगर तुम मिल जाओ

टूटी है मेरी है नींद मगर

मेरा दिलबर मेरा दिलदार

One Response to “तसव्वुर ख़ानुम के गाये कुछ लोकगीत”

  1. समीर लाल Says:

    वाह, अंकुर..पूरा डूबा गये भाई.

    बहुत आभार.

    ———————————–
    आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.

    एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.

    यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.

    शुभकामनाऐं.

    समीर लाल
    (उड़न तश्तरी)

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