लागी रे लागी लगन ये ही दिल में

स्वर: मेहदी हसन

लागी रे लागी लगन ये ही दिल में
दीप जले सुर के सागर में जब मैं गीत सुनाऊँ
लागी रे…

सरगम छेड़ूँ बरखा वर से जलती आग बुझाऊँ रे
लागी लगन…

नील गगन की परियाँ नाचें जब मैं तान लगाऊँ रे
लागी लगन…

दूर हों सारे दुःख अँधियारे प्यार की जोत जगाऊँ रे
लागी लगन…



One Response to “लागी रे लागी लगन ये ही दिल में”

  1. समीर लाल Says:

    वाह जी, आपका आभार इतनी उम्दा गजल चुन के लाने के लिए. मजा आ गया.

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