स्वर: मेहदी हसन
लागी रे लागी लगन ये ही दिल में
दीप जले सुर के सागर में जब मैं गीत सुनाऊँ
लागी रे…
सरगम छेड़ूँ बरखा वर से जलती आग बुझाऊँ रे
लागी लगन…
नील गगन की परियाँ नाचें जब मैं तान लगाऊँ रे
लागी लगन…
दूर हों सारे दुःख अँधियारे प्यार की जोत जगाऊँ रे
लागी लगन…
June 2, 2008 at 3:41 am |
वाह जी, आपका आभार इतनी उम्दा गजल चुन के लाने के लिए. मजा आ गया.