अब तो यही हैं दिल से दुआएँ

June 5, 2008

रचना: तस्कीन क़ुरेशी
स्वर: बेग़म अख़्तर

अब तो यही हैं दिल से दुआएँ, भूलने वाले भूल ही जाएँ

वजह-ए-सितम कुछ हो तो बताएँ, एक मोहब्बत लाख ख़ताएँ

दर्द-ए-मोहब्बत दिल में छुपाया, आँख के आँसू कैसे छुपाएँ

होश और उन की दीद का दावा, देखने वाले होश में आएँ

दिल की तबाही भूले नहीं हम, देते हैं अब तक उनको दुआएँ

रंग-ए-ज़माना देखने वाले, उन की नज़र भी देखते जाएँ

शग़्ल-ए-मोहब्बत अब है ये ‘तस्कीन’, शेर कहें और जी बहलाएँ