रचना: साहिर लुधियानवी
स्वर: मन्ना डे
लागा चुनरी में दाग छुपाऊँ कैसे
चुनरी में दाग छुपाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे
हो गयी मैली मोरी चुनरिया कोरे बदन सी कोरी चुनरिया
जाके बाबुल से नजरें मिलाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे
भूल गयी सब वचन विदा के खो गयी मैं ससुराल में आ के
जाके बाबुल से नजरें मिलाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे
कोरी चुनरिया आत्मा मोरी मैल है मायाजाल
वो दुनिया मोरे बाबुल का घर ये दुनिया ससुराल
जाके बाबुल से नजरें मिलाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे
Posted by अंकुर वर्मा