बात करनी मुझे मुशकिल कभी ऐसी तो न थी…

स्वर:मेंहदी हसन
रचना: बहादुर शाह ज़फ़र

3 Responses to “बात करनी मुझे मुशकिल कभी ऐसी तो न थी…”

  1. Dr.Arvind Mishra Says:

    मेरी पसंदीदा गजल ! कितने दिनों से सुनने की तमन्ना थी -जी चाहता है सदियों तक सुनता रहूँ ! शुक्रिया !!!

  2. Kajal Kumar Says:

    भाई बहुत, सुंदर. धन्यवाद इतनी सुंदर प्रस्तुति के लिए.

  3. रंजन Says:

    बहुत खुब.. ्बहुत सुना इसे..

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