हम उन्हें वो हमें भुला बैठे…
ऐसा नहीं के उनसे मुहब्बत नहीं रही…
एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिये…
वो हमें जिस कदर आजमाते रहे…
हम उन्हें वो हमें भुला बैठे…
ऐसा नहीं के उनसे मुहब्बत नहीं रही…
एक पल में एक सदी का मज़ा हम से पूछिये…
वो हमें जिस कदर आजमाते रहे…
August 11, 2009 at 5:23 am |
वाह वाह!! क्या चुन चुन के निकाली ख़ुमार साहेब की गज़लें!! बहुत आभार!!
August 11, 2009 at 7:25 am |
वाह ये तो आज सुबह सुबह ही खज़ाना हाथ लग गया बहुत बहुत धन्यवादखिरी गज़ल अच्छी तरह नही सुनी जा सकी आभार्
August 12, 2009 at 12:06 am |
क्या बात है आपने तो कमाल कर दिया… बधाई
August 14, 2009 at 10:18 pm |
good
November 7, 2009 at 10:44 pm |
خمار بارہ بنکوئ صاحب کی بات کُچھ اور ہے – بہت بہت شکریہ