स्वर: इक़बाल बानो
तू लाख चले रे गोरी थमथम के
पायल में गीत हैं छमछम के
तू पिया से मिलकर आयी है
बस आज से नींद परायी है
देखेगी सपने बालम के
ये जीवन भर का रोग सखी
तोहे पगली कहेंगे लोग सखी
याद आयेंगे वादे बालम के
मैनें भी किया था प्यार कभी
आयी थी यही झनकार कभी
अब गीत मैं गाती हूँ ग़म के
Posted by अंकुर वर्मा
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