स्वर: नय्यारा नूर
बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ उबटन खेलन हारे
अबीर गुलाल कुसुम और केसर भर-भर लई पिचकारी
रिमझिम-रिमझिम मेघा बरसे महक उठी फुलवारी
स्वर: नय्यारा नूर
बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ उबटन खेलन हारे
अबीर गुलाल कुसुम और केसर भर-भर लई पिचकारी
रिमझिम-रिमझिम मेघा बरसे महक उठी फुलवारी
रचना: बेहज़ाद लख़नवी
स्वर: नय्यारा नूर
ऐ जज़्बा-ए-दिल गर मैं चाहूँ हर चीज़ मुक़ाबिल आ जाये
मंज़िल के लिये दो गाम चलूँ और सामने मंज़िल आ जाये
हाँ याद मुझे तुम कर लेना आवाज़ मुझे तुम दे लेना
इस राह-ए-मुहब्बत में कोई दरपैश जो मुश्किल आ जाये
ऐ दिल की ख़लिश चल यूँ ही सही चलता तो हूँ उनकी महफ़िल में
उस वक़्त मुझे चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाये
ऐ रहबर-ए-कामिल चलने को तय्यार तो हूँ पर याद रहे
उस वक़्त मुझे भटका देना जब सामने मंजिल आ जाये
अब क्यूँ ढूँढ़ू वो चश्म-ए-करम होने दे सितम बला-ए-सितम
मैं चाहता हूँ ऐ जज़्बा-ए-ग़म मुश्किल पस-ए-मुश्किल आ जाये
इस जज़्ब-ए-दिल के बारे में एक मश्वरा तुम से लेता हूँ
उस वक़्त मुझे क्या लाज़िम है जब तुझ पे मेरा दिल आ जाये
ऐ बर्क़-ए-तजली क्या तूने मुझको भी मूसा समझा है
मैं तूर नहीं जो जल जाऊँ जो चाहे मुक़ाबिल आ जाये
आता है जो तूफ़ाँ आने दो कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुश्किल तो नहीं इन मौजों में बहता हुआ साहिल आ जाये
स्वर: बेग़म अख़्तर / नय्यारा नूर
तूने बुत-ए-हरजाई कुछ ऐसी अदा पाई
तकता है तेरी सूरत हर एक तमाशाई
पहले से न सोचा था अंजाम मोहब्बत का
तब होश में आये हैं जब जान पे बन आई
जी भर गया दुनिया से अब दिल में ये हसरत है
मैं हूँ या तेरा जलवा और ग़ोशा-ए-तनहाई
तानों से है दिल ज़ख़्मी ज़ख़्मों से जिगर ख़ूँ है
लो दिल के लगाने की हमने ये सज़ा पाई
बेग़म अख़्तर
नय्यारा नूर
रचना: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
स्वर: नय्यारा नूर
मेरा दर्द नग़मा-ए-बेसदा
मेरी ज़ात ज़र्रा-ए-बेनिशाँ
मेरे दर्द को जो ज़ुबाँ मिले
मुझे अपना नाम-ओ-निशाँ मिले
मेरी ज़ात को जो निशाँ मिले
मुझे राज़-ए-नज़्म-ए-जहाँ मिले
जो मुझे ये राज़-ए-निहाँ मिले
मेरी ख़ामोशी को बयाँ मिले
मुझे क़ायनात की सरवरी
मुझे दौलत-ए-दो-जहाँ मिले
रचना: अक़बर इलाहाबादी
स्वर: नय्यारा नूर
कहूँ किससे क़िस्सा-ए-दर्द-ओ-ग़म, कोई हमनशीं है न यार है
जो अनीस है तेरी याद है जो शफ़ीक़ है दिलज़ार है
तू हज़ार करता लगावटें मैं कभी न आता फ़रेब में
मुझे पहले इसकी ख़बर न थी तेरा दो ही दिन का ये प्यार है
ये नवीद औरों को जा सुना हम असीर-ए-नाम हैं ऐ सबा
हमें क्या चमन है जो रंग पर हमें क्या जो फ़सल-ए-बहार है
मुझे रहम आता है देखकर तेरा हाल ‘अक़बर’ रोहगर
तुझे वो भी चाहे ख़ुदा करे कि तु जिसका आशिक़-ए-ज़ार है