तेरे मिलने को बेकल हो गये हैं

May 8, 2008

रचना: नासिर काज़मी
स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम

तेरे मिलने को बेकल हो गये हैं
मगर ये लोग पागल हो गये हैं
(बेकल == व्याकुल)

बहारें लेके आये थे जहाँ तुम
वो घर सुनसान जंगल हो गये हैं

यहाँ तक बढ़ गये आलम-ए-हस्ती
कि दिल के हौसले शल हो गये हैं
(शल == थक जाना)

कहाँ तक ताब लाये नातवाँ दिल
कि सदमे अब मुसलसल हो गये हैं
(ताब == सहनशीलता, नातवाँ == कमजोर, मुसलसल == निरन्तर)

निगाह-ए-यास को नींद आ रही है
मुसर्दा पुरअश्क बोझल हो गये हैं
(निगाह-ए-यास == उदास आँखें, मुसर्दा == , पुरअश्क == आँसुओं से भरे)

उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना
यहाँ जो हादसे कल हो गये हैं

जिन्हें हम देख कर जीते थे ‘नासिर’
वो लोग आँखों से ओझल हो गये हैं


दरिया पार उतर जाऊँ

April 29, 2008

स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम

दरिया पार उतर जाऊँ फिर चाहे मैं मर जाऊँ

दिल दुखता ही रहता है मैं जिस सोच नगर जाऊँ

ज़िन्दा हूँ इल्ज़ाम तरह जाने किसके सर जाऊँ

तन्हाई है साथ तो फिर किससे मिलने घर जाऊँ


गोरी करत सिंगार

March 24, 2008

रचना: परवीन शाक़िर
स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम

गोरी करत सिंगार बाल बाल मोती चमकाये
रोम रोम महकाये गोरी करत सिंगार

मांग सिंदूर की सुन्दरता से चमके चंदन हार
जूड़े में जूही की बेली बाँह में हार सिंगार
गोरी करत सिंगार

कान में जगमग बाली पत्ता गले में जुगनू हार
संदल ऐसी पेशानी पर बिंदिया लायी बहार
गोरी करत सिंगार

सब्ज़ कटारा सी आँखों में कजरे की दो धार
गालों की सुर्खी में झलके हिरनी का इक़रार
गोरी करत सिंगार


कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में

March 14, 2008

स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम

कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में
फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या

कोई रंग तो दो मेरे चेहरे को
फिर जख़्म अगर महकाओ तो क्या

मैं तनहा था मैं तनहा हूँ
तुम आओ तो क्या न आओ तो क्या

जब हम ही न महके फिर साहब
तुम बाद-ए-सबा कहलाओ तो क्या
(बाद-ए-सबा == सुबह की हवा/ पछुआ पवन)


अनोखा लाड़ला

March 10, 2008

स्वर: बलक़ीस ख़ानुम / टीना सानी

अनोखा लाड़ला
खेलन को माँगे चाँद रे
अनोखा लाड़ला
कैसी अनोखी बात रे
अनोखा लाड़ला

तन के घाव तो भर गये दाता
मन का घाव नहीं भर पाता
जी का हाल समझ नहीं आता
कैसी अनोखी बात रे
अनोखा लाड़ला
खेलन को माँगे चाँद रे
अनोखा लाड़ला

प्यास बुझे कब इक दर्शन में
तन सुलगे बस एक लगन में
मन बोले रख लूँ नयनन में
कैसी अनोखी बात रे
अनोखा लाड़ला
खेलन को माँगे चाँद रे
अनोखा लाड़ला

जिस पे न बीती वो कब जाने
जग वाले आये समझाने
पागल मन कोई बात न माने
कैसी अनोखी बात रे
अनोखा लाड़ला
खेलन को माँगे चाँद रे
अनोखा लाड़ला