तुम और फ़रेब खाओ

May 12, 2008

रचना: आग़ा हश्र
स्वर: फ़रीदा ख़ानुम

तुम और फ़रेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से
तुम से तो कम गिला है ज़ियादा नसीब से

बरबाद-ए-दिल का आख़िरी सरमाया थी उम्मीद
वो भी तो युम ने छीन लिया मुझ ग़रीब से

गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है
होता है पहरों ज़िक्र तुम्हारा तबीब से

धुंधला चली निगाह दम-ए-वापसी है अब
आ पास आ के देख लूँ तुझको क़रीब से

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सजन लागी तोरी लगन मन मा

May 11, 2008

स्वर: फ़रीदा ख़ानुम

सजन लागी तोरी लगन मन मा
लाज मोहे आये हाय रे हाय
लगायी तेने कैसी लगन मन मा

हर आहट पर धड़के मनवा
छनके पायल मोरी खनके कंगनवा
तोरे बिन रसिया मोरे मन बसिया
पल पल होवे चुभन मन मा

मिलने की रैना महके सजरिया
सौतन द्वारे जइयो न सँवरिया
जल जल जाये सौतन घरवा

सजन लागी तोरी…


मिलन रुत आई

April 20, 2008

स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान और फ़रीदा ख़ानुम

फूल-फूल ने ली अंगड़ाई कली-कली मुस्काई
मिलन रुत आई…

गुलशन-गुलशन में फूलों ने रंग नये बिखराए
बादल भी अपने दामन में भर-भर मौजें लाये
महफ़िल-महफ़िल गूँज उठी है खुशियों की शहनाई
मिलन रुत आई…

उजली-उजली किरणों से आँख हुई है रोशन
गया अंधेरा हुआ सवेरा चमका दिल का आँगन
होते होते रौनक में लबदीर हुई तनहाई
मिलन रुत आई…

दिल ने दिल से माँग लिया है चाहत का नज़राना
होठों पर भी आ पहुँचा है प्यार भरा अफ़साना
मेघ मल्हार के सुर मे भीगी खुशबू हर सू छाई
मिलन रुत आई…


ये क्या के एक जहाँ को

March 13, 2008

रचना: सूफ़ी ग़ुलाम मुस्तफ़ा तबस्सुम
स्वर: फ़रीदा ख़ानुम

ये क्या के एक जहाँ को करो वक़्फ़-ए-इज़्तराब
ये क्या के एक दिल को शकेबाँ न कर सको
(वक़्फ़-ए-इज़्तराब == बेचैनी की विरासत, शकेबाँ == आराम देना)

ऐसा न हो ये दर्द बने दर्द-ए-लाज़वल
ऐसा न हो के तुम भी मुदावा न कर सको
(दर्द-ए-लाज़वल == लाइलाज मर्ज, मुदावा == इलाज)

शायद तुम्हें भी चैन न आये मेरे बग़ैर
शायद ये बात तुम भी गवारा न कर सको

क्या जाने फिर सितम भी मयस्सर हो न हो
क्या जाने ये करम भी करो या न कर सको
(मयस्सर == संभव/मुमकिन)

अल्लाह करे जहाँ को मेरी याद भूल जाय
अल्लाह करे के तुम कभी ऐसा न कर सको

मेरे सिवा किसी की न हो तुम को जुस्तजू
मेरे सिवा किसी की तमन्ना न कर सको
(जुस्तजू == इच्छा/चाह)


वो मुझसे हुये हमकलाम अल्लाह

March 12, 2008

रचना: सूफ़ी ग़ुलाम मुस्तफ़ा तबस्सुम
स्वर: फ़रीदा ख़ानुम

वो मुझसे हुये हमकलाम अल्लाह अल्लाह
कहाँ मैं कहाँ ये मकाम अल्लाह

वो रु-ए-दरख़्शाँ वो ज़ुल्फ़ों के साये
वो हंगामा-ए-सुबह-ओ-शाम अल्लाह अल्लाह
(रु-ए-दरख़्शाँ == रोशन चेहरा)

वो सहमा हुआ आँसुओं का तलातुम
वो आब-ए-रवा बेशरम अल्लाह अल्लाह
(तलातुम == सैलाब, तूफ़ान, आब-ए-रवा == बहता हुआ पानी)

वो ज़ब्त-ए-सुख़न में लबों की ख़ामोशी
नज़र का वो लुत्फ़-ए-करम अल्लाह अल्लाह
(ज़ब्त-ए-सुख़न == बातों पर नियंत्रण, लुत्फ़-ए-करम == कृपा का आनंद)