नैनोटेकनोलॉजी: एक नया विषय

नैनोटेकनोलॉजी को अलग विषय के रूप में अध्ययन करने की क्या आवश्यकता है?
२० वीं शताब्दी तक हमने भौतिकी तथा रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में काफी प्रगति कर ली थी| दैनिक जीवन में होने वाले अनेक प्रक्रमों की विस्तार में व्याख्या भौतिकी के नियमों से करी गयी| परन्तु सूक्ष्म प्रक्रमों के अध्ययन में एक समस्या सामने आयी कि इतने छोटे पैमाने पर गुरुत्वीय बल की तुलना में अन्य अंतराणविक बल अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं| अतः सूक्ष्म विज्ञान के अध्ययन हेतु हमें पुनः नए सिरे से एक सिद्धांत विकसित करने की आवश्यकता पड़ी| इसी विधा को नैनोटेकनोलॉजी या अतिसूक्ष्म विज्ञान का नाम दिया गया है| इसे थोड़ा और अच्छी तरह से समझने के लिए एक कांच की नली में पानी के बहाव का उदाहरण लेते हैं| यदि नली में पानी को नीचे से ऊपर ले जाना है तो हमें नीचे से दबाव लगाना पड़ेगा जैसा कि एक पम्प करता है | परन्तु यदि हम इसी नली का व्यास काफ़ी कम कर दें तो केशिकात्व के प्रभाव से पानी स्वतः ही कुछ ऊंचाई तक चढ़ जाता है| ऐसा पानी व कांच के अणुओं के बीच लगने वाले आसंजक बल के कारण होता है| अतः सूक्ष्म नलियों में प्रवाह की रूपरेखण हेतु इन सभी तथ्यों पर प्रकाश डालने की आवश्यकता पड़ती है|

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3 Responses to नैनोटेकनोलॉजी: एक नया विषय

  1. Gyan Dutt Pandey कहते हैं:

    हम जैसे नॉन-टेक को समझा ले गये! सो मानलो कि हिन्दी में बढ़िया लिख ले रहे हो मित्र।
    नियमित-सतत पोस्ट ठेलते रहें।

  2. श्रीश शर्मा कहते हैं:

    अच्छी जानकारी, भविष्य में इस प्रकार से ज्ञानवर्धन की कोशिश करते रहा करें।

  3. kakesh कहते हैं:

    अच्छी जानकारी.

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