कुछ चुनिंदा रचनाएँ

प्रस्तुत हैं मेरे कविता संग्रह से चुनित कुछ प्रसिद्ध कवियों की कुछ प्रसिद्ध रचनाएँ| आशा है की आप लोगों को ये कुछ सोचने पर मजबूर अवश्य करेंगी|

है बहुत बरसी धरित्री पर अमृत की धार;
पर नहीं अब तक सुशीतल हो सका संसार|
भोग लिप्सा आज भी लहरा रही उद्दाम;
बह रही असहाय नर कि भावना निष्काम|
लक्ष्य क्या? उद्देश्य क्या? क्या अर्थ?
यह नहीं यदि ज्ञात तो विज्ञानं का श्रम व्यर्थ|
यह मनुज, जो ज्ञान का आगार;
यह मनुज, जो सृष्टि का श्रृंगार |
छद्म इसकी कल्पना, पाखण्ड इसका ज्ञान;
यह मनुष्य, मनुष्यता का घोरतम अपमान|
– रामधारी सिंह ‘दिनकर’

कहाँ नश्वर जगत में शांति , सृष्टि ही का तात्पर्य अशांति |
जगत अविरत जीवन संग्राम, स्वप्न है यहाँ विराम |
यही तो है असार संसार, सृजन सिंचन संहार |
– सुमित्रा नन्दन पंत

दीप से जलना न सीखो, दीप से मुस्कान सीखो;
सूर्य से ढलना न सीखो, सूर्य से उत्थान सीखो |
अपनी मजबूरी पे, अश्क बहाने वाले राही;
राह चलना ही न सीखो, राह का निर्माण सीखो|
– अज्ञात (यदि आपको पता हो तो अवश्य बताएँ)

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2 Responses to कुछ चुनिंदा रचनाएँ

  1. Gyan Dutt Pandey कहते हैं:

    अज्ञात का पता तो नहीं है, पर पंक्तियाँ हैं प्रेरक! रॉबर्ट फ्रॉस्ट की प्रसिद्ध कविता ‘रोड लेस ट्रेवल्ड’ की याद दिलाती हैं।

  2. sudhakar कहते हैं:

    these lines are very powerfull and tell us how to live life and reach the goal.

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