केमिकल ईंजीनिअरिंग और केमिस्ट्री

“बेटा आजकल क्या कर रहे हो?”
“अंकल, अभी बी. टेक. में एडमिशन लिया है|”
“बहुत अच्छा… स्ट्रीम कौन सी है?”
“जी केमिकल ईंजीनिअरिंग”
“ओह केमिस्ट्री! ठीक है मन लगा के पढ़ो … हमें तो हमेशा से ही केमिस्ट्री पसंद नहीं आयी|”
केमिस्ट्री?
यह बात है कोई १० साल पहले की है पर अब भी अक्सर सुनाई दे जाती है| जब भी कोई केमिकल ईंजीनिअरिंग और केमिस्ट्री में ऐसा सीधा सम्बन्ध स्थापित कर देता था, हमें बहुत अखरता था| क्योंकि एक सामान्य आदमी की तरह हमें भी केमिस्ट्री में कोई खास रुचि नहीं थी| जब भी हमने कोशिश की दोनों में अन्तर समझाने की, ज़्यादातर लोगों की समझ में नहीं आया| दरअसल आज भी अधिकतर लोग इन दोनों विषयों में विभेद करने में असफल हैं| अतः सोचा कि यदि ऐसा ही कोई व्यक्ति मेरा ये ब्लॉग पढ़ रहा हो तो ये भ्रांति दूर करने की कोशिश करूं| ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो १९ वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में सर्वप्रथम केमिकल इंजीनियरिंग को एक अलग विषय के रूप में एम आई टी में प्रारम्भ किया गया| इसे कोर्स १० का नाम दिया गया| उस समय जरूरत थी ऐसे पेशेवर लोगों की जोकि मेकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिस्ट्री और फार्मेसी के बीच के अन्तर को भर सकें| केमिकल इंजीनियरिंग के इतिहास के बारे में अधिक जानकारी हेतु कृपया यहाँ क्लिक करें| यदि केमिकल इंजीनियरिंग के शब्दकोश अर्थ को देखें तो यह इंजीनियरिंग की वह शाखा है जिसमें औद्योगिक स्तर पर रासायनिक प्रक्रमों में प्रयोग होने वाले संयंत्रों (उदाहरण के लिए रिएक्टर, डिस्टिलेशन कालम, ऊष्मा परिवर्तक, एब्सोर्पशन टावर, क्रिस्टलाइजर इत्यादि) की अभिकल्पना, निर्माण तथा परिचालन से संबंधित विषयों का अध्ययन किया जाता है| इतना ही नहीं एक केमिकल इंजिनियर को भौतिकी, रसायन व गणित के अतिरिक्त पदार्थ विज्ञान, जैव-अभियांत्रिकी तथा औषधीय विषयों का ज्ञान भी आवश्यक होता है| अपने इसी चहुँमुखी ज्ञान और उपयोगिता के कारण केमिकल इंजिनियर परंपरागत उद्यमों के अतिरिक्त औषधि क्षेत्र, माइक्रोइलेक्ट्रानिक्स, जैव प्रौद्यौगिकी तथा रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में भी बहुतायत में कार्यरत पाये जाते है| नैनो युग के पदार्पण के बाद केमिकल इंजीनियरिंग का महत्त्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इसके बहुविधिक चरित्र को देखते हुए केमिकल इंजिनियर इस नए क्षेत्र में सर्वाधिक अनुकूल प्राणी हैं| संक्षेप में, यह सत्य है कि केमिकल इंजीनियरिंग और केमिस्ट्री के बीच में सम्बन्ध है परन्तु यह इतना सीधा नहीं है| शायद इस पोस्ट से आपको यह लगे कि एक केमिकल इंजिनियर है इसी लिए अपना गुणगान स्वयं ही कर रहा है परन्तु मेरी कोशिश सिर्फ़ अपनी व्यथा बताते हुए कुछ लोगों के भ्रम को दूर करना मात्र ही है|

_____________________

१ रिएक्टर: एक पात्र जिसमें कि तरह – तरह की रासायनिक अभिक्रियायें यथोचित वातावरण (ताप, दाब, उत्प्रेरक) में कराई जाती हैं|
२ डिस्टिलेशन कालम: आसवन संयंत्र जिसके माध्यम से अलग-अलग क्वथनांक (boiling point) वाले द्रवों को उनके मिश्रण से पृथक किया जाता है|
३ ऊष्मा परिवर्तक (heat exchanger): इस यन्त्र का उपयोग भिन्न ताप के दो ग्रावों के बीच ऊष्मा विनिमय के लिए किया जाता है|
४ एब्सोर्पशन टावर: इसमें नीचे से प्रवाहित गैस या उसमें उपस्थित कोई अवयव को आंशिक या पूर्णरूप से ऊपर से गिरते हुए द्रव में अवशोषित कराया जाता है|
५ क्रिस्टलाइजर: एक संतृप्त विलयन (saturated solution) से विलेय पदार्थ के क्रिस्टल बनाने हेतु यह प्रयोग में आता है|
६ एम आई टी: मेसेचुसेत्स इन्स्टीच्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Massachusetts institute of technology), अमेरिका में स्थित एक प्रतिष्ठित व अग्रणी प्रौद्योगिकी संस्थान

Advertisements

6 Responses to केमिकल ईंजीनिअरिंग और केमिस्ट्री

  1. राजीव कहते हैं:

    बहुत सही किया आपने यह भ्रांति मिटाने में सहयोग करने वाली पोस्ट लिखकर। यद्यपि इस विषय पर अभी और भी स्पष्ट करने की आवश्यकता है। यहाँ तक कि समकालीन दूसरे संकायों के विद्यार्थी भी नहीँ जानते इस भेद / समानता को ठीक प्रकार से।

  2. Arvind Chaturvedi कहते हैं:

    पहली बार आया आपके ब्लौग पर .अच्छा लगा. रोचक विषय लगा.
    बाकी पोस्ट भी देखी.
    फिर भेट होगी. ब्लोग पर .
    शुभकामनायें

  3. Gyan Dutt Pandey कहते हैं:

    अच्छा किया यह लिखा। बहुत से ब्लॉगर भी अंतर न समझते होंगे।

  4. नीरज रोहिल्ला कहते हैं:

    हा…
    ये पोस्ट पढी थी कल सुबह, और सोचा था किसी अंदर के आदमी ने लिखी है । फ़िर इसको बुकमार्क भी किया था ये सोचकर कि फ़िर से पढकर आगे इस विषय पर एक पोस्ट हम भी लिखेंगे ।
    अब पता चला कि ये तो तुम निकले, बाकी पोस्ट पढकर टिपियाना अभी बाकी है । वैसे टिप्पणी सम्राट समीरानन्दजी का आशीर्वाद तुम्हे मिलता ही रहेगा ।

    मैने कानपुर का टिकट बुक करा लिया है आज, एक बार फ़िर तुम्हें परेशान करने १२ की सुबह आ रहे हैं । इस बार एक बोतल ओल्डमोंक का इन्तजाम करके रखना ।

  5. kakesh कहते हैं:

    सराहनीय प्रयास है यह.हमें तो मालूम था पर बहुतों को मालूम नहीं होगा.

  6. विकास कहते हैं:

    इसी भ्रांति में तो मैं था, वो तो पढ़ाई शुरु करनेके बाद ही वास्तविकता से परिचय हो सका.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: