आखिरकार ताजमहल भी देख ही लिया

पिछले कुछ दिनों से वो क्या कहते हैं हमारे पैरों में सनीचर सवार हो गया है| यही कारण था की गत २६ वर्षों में २० से अधिक बार आगरा जाने के बाद भी जो काम हमने नहीं किया पैरों में सवार सनीचर ने इस बार करा दिया| जीहाँ अब हम भी ताज देखने वालों के समूह में आ गए हैं| दरअसल इन दिनों श्री रोद्रिगो मार्तिनेज़, जोकि कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय इरविन में शोधार्थी हैं, ३ माह के लिए सहयोगी शोधकार्य हेतु आई आई टी कानपुर स्थित हमारी प्रयोगशाला में आए हुए हैं| हमारे सभी मित्र पहले से ही ताज देख चुके थे इसलिए केवल हम ही बचे उनके साथ जाने के लिए| कानपुर से आगरा करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर है अतः हमने केवल एक दिन का प्लान बनाया| प्रातः साढ़े ८ बजे इलाहबाद-मथुरा एक्सप्रेस से हम आगरा कैंट स्टेशन पर उतरे और वहाँ से सीधा ईदगाह बस-स्टैंड पहुँच गए फ़तेहपुर-सीकरी जाने के लिए| करीब सवा ९ बजे बस चली जिसने हमें ११ बजे फ़तेहपुर-सीकरी उतार दिया| वहाँ पहले हमलोग बुलंद दरवाजा और सलीम चिश्ती दरगाह देखने गए| पता चला कि यह क्षेत्र अभी भी सरकार ने अपने संरक्षण में नहीं लिया है और चिश्ती परिवार ही अभी भी इसकी देखरेख करता है अतः आप यहाँ के रखरखाव से संतुष्ट नहीं हो सकते| इसके अतिरिक्त उसी परिसर में एक मस्जिद चिश्ती परिवार की अन्य कब्रें तथा अनारकली का सुरक्षित भूमिगत पलायन मार्ग भी देखा; बताया गया कि यह आगरा के लालकिले से दिल्ली होता हुआ लाहौर तक जाता है जहाँ पर आज भी अनारकली की मज़ार उपस्थित है| खैर गाइड महोदय को भी शायद ज़्यादा उम्मीद नहीं थी कि हम उनकी इस बात से सहमत होंगे| कहानी कुछ इस प्रकार है कि सलीम चिश्ती अजमेर के ख्वाज़ा मुईनुद्दीन् चिश्ती के पौत्र थे| जब बादशाह अकबर द्वारा संतान प्राप्ति की दिशा में किए गए सभी प्रयास निष्फल रहे तो वह स्वप्न में आए निर्देश के मुताबिक़ बाबा सलीम चिश्ती के पास आए| उन्हीं के आशीर्वाद से अकबर को महारानी जोधाबाई से पुत्र प्राप्ति हुई और बाबा के नाम पर उसका नाम भी सलीम रखा गया| बाबा सलीम चिश्ती के सम्मान में ही बादशाह ने ये बुलंद दरवाजा बनवाया| उसके बाद अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी भी बनाया परन्तु केवल १५ वर्षों में ही उसे अपना यह निर्णय बदलना पड़ा| इसके अलावा यहाँ पर बादशाह अकबर का महल भी है जोकि भारत सरकार के पुरातत्व संरक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है| यहाँ पर हमने जोधाबाई महल, पंचमहल, अस्तबल, पचीसी दरबार, दीवान-ऐ-खास, दीवान-ऐ-आम, बीरबल महल, अनूप तालाब (जहाँ पर सुरसम्राट तानसेन अपना संगीत वाचन करते थे) इत्यादि भी देखा| यह सब जानकर एक बार को तो यकीन हो गया कि जो भी मुग़ल-ऐ-आज़म में दिखाया गया था वो कुछ तो वास्तविकता से प्रेरित था|

बुलंद दरवाज़ा अनूप तालाव पंच महल

फ़तेहपुर सीकरी से लौटने के बाद हम लोगों ने सीधे ताजमहल जाने का निर्णय लिया| वहाँ जाकर पता चला कि प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए केवल २० रुपये है जबकि विदेशी नागरिकों के लिए यह ७५० रुपये है| विदेशियों के साथ इसके बदले कोई खास विशिष्ट व्यव्हार नहीं किया जाता| अपने मित्र के इस बात से संबंधित प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं था हमारे पास| इसके अतिरिक्त आगरा के लालकिले व फ़तेहपुर-सीकरी किले में भी इसी प्रकार भेदकर शुल्क का प्राविधान है| भारतीय रु.२० और विदेशी रु.२५०| हाँ यदि आप ताज का टिकट पहले ले लें तो कोई दूसरे टिकट लेने की आवश्यकता नहीं है| जहाँ तक ज्ञान जी के इस प्रश्न का सवाल है कि पाकिस्तानी व बंगलादेशी को कैसे पहचानते है कि वे विदेशी हैं, दरअसल वहाँ ऐसा कोई प्राविधान नहीं है जिससे कि यह पता चल सके कि कोई देशी है या विदेशी| यह आपकी इमानदारी पर आश्रित है कि आप वहाँ लगे निर्देशों का पालन करें| यह बात अवश्य है कि यदि आप गोरी चमड़ी वाले हैं या फ़िर नीग्रो हैं तो आप को वहाँ गेट पर रोक दिया जाएगा| ताज के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जाँच के लिए दो (स्त्री व पुरूष) लम्बी कतार लगी थी| वहाँ पर उपस्थित कुछ दलालों ने हमें बिना पंक्तिबद्ध हुए प्रवेश कराने का प्रस्ताव दिया| इसके बदले उनकी मांग २५० से शुरू होकर ५० रुपये तक आ गयी पर हमने साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार से सख्त परहेज है और उनके द्वारा बताई गयी यह बात भी सफ़ेद झूठ साबित हुयी कि पंक्ति में हमें एक घंटे से ज्यादा लगेगा क्योंकि १५ मिनट से भी कम समय में हम अन्दर थे| अतः यदि आप या आपका कोई संबन्धी ताज जाय तो कृपया इस प्रकार के माफिया से सावधान रहे और उनकी किसी भी बात पर यकीन न करे|

ताज महल प्रवेश द्वार ताज महल ताज महल की �ीड़

अगले करीब ढाई घंटे हम लोगों ने ताज परिसर में बिताये| ताजमहल की सबसे ख़ास बात मेरे हिसाब से इसकी सिमेट्री है क्योंकि भारत में इससे कहीं अधिक कलाकारी के और नमूने उपलब्ध हैं| परन्तु शायद कोई भी इतना बड़ा और सुडौल नहीं होगा| एक और बात हमने ध्यान दी कि आप ताज को जितना दूर से देखें यह उतना ही सुंदर लगता है क्योंकि दूर से ही आप उसकी सुडौलता को समझ सकते हैं| ताज मैं शाम के समय बहुत भीड़ होती है अतः संभवतः सुबह का समय उपयुक्त होता है यहाँ भ्रमण के लिए| ताज के पीछे बहती यमुना यदि साफ़ होती तो दृश्य काफ़ी मनोरम होता| समयाभाव के कारण हम आगरा के किले नहीं जा पाए जो कि संभवतः फतेहपुर-सीकरी जैसा ही है बजाय इसके कि यहाँ से ताजमहल दिखता है| इसके अलावा आगरा का प्रसिद्ध पंछी पेठा खाने का भी अवसर नहीं मिला|
यात्रा के अन्य छायाचित्र निम्नांकित लिंक पर उपलब्ध हैं…

आगरा यात्रा
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21 Responses to आखिरकार ताजमहल भी देख ही लिया

  1. अनूप शुक्ल कहते हैं:

    अच्छा किया जो आगरा हमें भी घुमवा दिया। यह भीकि वहां हमारे नाम् का
    तालाब है और हमें पता ही नहीं। 🙂

  2. Gyan Dutt Pandey कहते हैं:

    वहाँ जाकर पता चला कि प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए केवल २० रुपये है जबकि विदेशी नागरिकों के लिए यह ७५० रुपये है|
    ———————————————-

    यह तो अजीब है! बराबर न होता तो 25-50 रुपये ज्यादा होता, बस।
    और पाकिस्तानी/बांगलादेशी को कैसे विदेशी चिन्हित करते हैं?!

  3. kakesh कहते हैं:

    घूम लिया जी आगरा भी.

  4. tajmahal कहते हैं:

    धन्यवाद ..हमको भी आप ने घुम्वा ही दिया.अच्छा वृत्तांत था.

    TajMahal

  5. ayushi कहते हैं:

    mujhe to aub jane ka man kar rha hai.

  6. amit gupta कहते हैं:

    mai to padha hi nahi
    jub dekh ke aaunga to padhunga

  7. Prava कहते हैं:

    I go to taj on the aieee exam my center is given in delhi
    – pradip chandra prava, jharkhand

  8. Anil Kumar Gupta कहते हैं:

    tajmahal ki seenery bahut achchhi hai or bhartiya tuerests ke liye tajmahal dekhana or waha se shopping karna bahut sasta hai

  9. GYANDUTT कहते हैं:

    wah taj wah u r great
    and india is also great.

  10. manoj kdee कहते हैं:

    good I liked the article u have writrten on it along with ur
    segestions thanks for for ur sugesstions. Manoj Bihar

  11. Surendra kumar कहते हैं:

    Tajmahal is my dream’s temple.

  12. md.shaukat khan कहते हैं:

    jo chighh hamare lia khabon o khayalon ki bat thi aj uska deedar ho hi gaya.ap ka blog dekha aur ghar baithhe hi us anmol dharoher taj mahal ko dekh lia.

  13. kirti gupta कहते हैं:

    tajmahal bahut achha lagta hi

  14. hasnat-e-tabrezy कहते हैं:

    i saw the taj.Ilike it.

    Taj ulfat ki nishani hai muhabbat ka payam,
    sare alam ko jo deta hai aman ka paigam.
    saikdo tarah ke toofano se takrata hai,
    jamna chadhti to husn aur nikhar ata hai .

    Nashatr Bharti- Jhansi

  15. aditya bajpai कहते हैं:

    vratant bahut bahut accha laga

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