शोला था जल बुझा हूँ

शायर: अहमद फ़राज़
स्वर: मेंहदी हसन

शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो
(सदाएं == आवाज़)

जो ज़हर पी चुका हूँ तुम्हीं ने मुझे दिया
अब तुम तो ज़िंदगी की दुआएं मुझे न दो

शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो

ऐसा कभी न हो के पलट कर न आ सकूँ
हर बार दूर जा के सदाएं मुझे न दो

शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो

कब मुझको ऐतराफ़-ए-मुहब्बत न था ‘फ़राज़’
कब मैंने ये कहा था सज़ाएं मुझे न दो
( ऐतराफ़ == क़ुबूल, स्वीकार)

शोला था जल बुझा हूँ हवाएं मुझे न दो
मैं कब का जा चुका हूँ सदाएं मुझे न दो

यू-ट्यूब वीडियो:

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3 Responses to शोला था जल बुझा हूँ

  1. नीरज रोहिल्ला कहते हैं:

    बहुत बढिया,
    आजकल गज़लों में डूबे हुये हो क्या? एक के बाद एक अच्छी गज़लें सुनवा रहे हो । इस (जिन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं, मैं तो मर के भी मेरी जान तुझे चाहूँगा) गज़ल का लाइव वीडियो जुगाड कर सको तो मजा आ जायेगा ।

  2. Gyan Dutt Pandey कहते हैं:

    बढ़िया, ऐसे ही रस बांटते रहो।

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