ग़म है या ख़ुशी है तू

रचना: नासिर काज़मी
स्वर: नुसरत फ़तेह अली ख़ान

ग़म है या ख़ुशी है तू, मेरी ज़िन्दगी है तू

आफ़तों के दौर में, चैन की घड़ी है तू

मेरी रात का चिराग़, मेरी नींद भी है तू

मैं ख़िज़ाँ की शाम हूँ, रुत बहार की है तू

दोस्तों के दर्मियान, वजह-ए-दोस्ती है तू

मेरी सारी उम्र में, एक ही कमी है तू

मैं तो वो नहीं रहा, हाँ मगर वोही है तू

‘नासिर’ इस दयार में, कितना अजनबी है तू

राहत फ़तेह अली ख़ान

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One Response to ग़म है या ख़ुशी है तू

  1. Prashant Priyadarshi कहते हैं:

    kaartoos movie ka ye geet ko naye andaaj me suna kar dil khush kar diya.. 🙂

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