मोहब्बत करनेवाले कम न होंगे

रचना: हफ़ीज़ होशियारपुरी
स्वर: मेहदी हसन

मोहब्बत करनेवाले कम न होंगे
तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे

ज़माने भर के ग़म या इक तेरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे

दिलों की उलझनें बढ़ती रहेंगी
अगर कुछ मश्वरे बाहम न होंगे
(बाहम == आपस में)

अगर तू इत्तफ़ाक़न मिल भी जाये
तेरी फ़ुर्क़त के सदमें कम न होंगे
(फ़ुर्क़त == जुदाई)

‘हफ़ीज़’ उन से मैं जितना बदगुमाँ हूँ
वो मुझ से इस क़दर बर्हम न होंगे
(बदगुमाँ == शक करना, बर्हम == नाराज़)

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