मेरा दर्द नग़मा-ए-बेसदा

रचना: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
स्वर: नय्यारा नूर

मेरा दर्द नग़मा-ए-बेसदा
मेरी ज़ात ज़र्रा-ए-बेनिशाँ
मेरे दर्द को जो ज़ुबाँ मिले
मुझे अपना नाम-ओ-निशाँ मिले
मेरी ज़ात को जो निशाँ मिले
मुझे राज़-ए-नज़्म-ए-जहाँ मिले
जो मुझे ये राज़-ए-निहाँ मिले
मेरी ख़ामोशी को बयाँ मिले
मुझे क़ायनात की सरवरी
मुझे दौलत-ए-दो-जहाँ मिले

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2 Responses to मेरा दर्द नग़मा-ए-बेसदा

  1. MEET कहते हैं:

    वाह ! क्या बात है. शुक्रिया.

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