बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ

स्वर: नय्यारा नूर

बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ उबटन खेलन हारे

अबीर गुलाल कुसुम और केसर भर-भर लई पिचकारी

रिमझिम-रिमझिम मेघा बरसे महक उठी फुलवारी

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3 Responses to बाँध कंगनवा पकड़ी बइयाँ

  1. समीर लाल कहते हैं:

    आनन्द आ गया सुन करके. आभार, इसे पेश करने का.

  2. - लावण्या कहते हैं:

    मधुर गीत सुनवाने के लिये आपका शुक्रिया —

  3. Rohit Jain कहते हैं:

    उम्दा पेशकश…. शुक्रिया

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