लागा चुनरी में दाग

रचना: साहिर लुधियानवी
स्वर: मन्ना डे

लागा चुनरी में दाग छुपाऊँ कैसे
चुनरी में दाग छुपाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे

हो गयी मैली मोरी चुनरिया कोरे बदन सी कोरी चुनरिया
जाके बाबुल से नजरें मिलाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे

भूल गयी सब वचन विदा के खो गयी मैं ससुराल में आ के
जाके बाबुल से नजरें मिलाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे

कोरी चुनरिया आत्मा मोरी मैल है मायाजाल
वो दुनिया मोरे बाबुल का घर ये दुनिया ससुराल
जाके बाबुल से नजरें मिलाऊँ कैसे घर जाऊँ कैसे

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4 Responses to लागा चुनरी में दाग

  1. संजय पटेल कहते हैं:

    अंकुर भाई ज़िन्दगी के फ़लसफ़े को बयान करती ये रचना चित्रपट संगीत की एक उपलब्धि है.बेशक़ीमती पेशकश.

  2. समीर लाल कहते हैं:

    बहुत बढ़िया गीत चुन कर लाये हैं.

  3. riyaj rinaj कहते हैं:

    best song.man prfullit ho gaya.

  4. Bipin Kumar Sinha कहते हैं:

    Although it is afilmy song but it has a deep meaning.When we come in this world babul sends with kori ghunaria and we have to livehere insuch amanner that chunaria must not be full of stain.We have to keep it stainless so that when return from here to babuls house it should be the same as it was earlier.Kabir says like this Jas ki tas dhar dini chadaria meaning chunaria is stainless as it was before. Bipin

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